लखनऊ। मोहनलालगंज क्षेत्र से किशोरियों को शादी का झांसा देकर राजस्थान में बेचने वाले अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह गरीब और असहाय परिवारों की किशोरियों की तस्वीरें वॉट्सएप के जरिए राजस्थान भेजता था, जहां उनकी बोली लगाकर सौदा तय किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पिछले लगभग छह वर्षों से सक्रिय था। गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाते थे। पहले उनकी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाती थी, फिर राजस्थान में बैठे नेटवर्क से संपर्क कर सौदा तय किया जाता था। इसके बाद किशोरियों को बहला-फुसलाकर या परिजनों को पैसों का लालच देकर राजस्थान ले जाया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि प्रत्येक किशोरी के सौदे में स्थानीय एजेंटों को एक से डेढ़ लाख रुपये तक कमीशन मिलता था। लड़कियों की कीमत ढाई लाख रुपये से शुरू होती थी और सौदे के अनुसार रकम बढ़ाई जाती थी।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब मोहनलालगंज के गनियार गांव निवासी कमलेशा ने 12 मई को अपनी 16 और 12 वर्षीय नातिनों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीमों का गठन किया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।
करीब 24 दिनों तक चली जांच में पुलिस ने 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके बाद 18 मई को दोनों नाबालिग बहनों को सकुशल बरामद कर लिया गया। पूछताछ में किशोरियों ने बताया कि उन्हें राजस्थान ले जाकर शादी के नाम पर बेचने की तैयारी की जा रही थी।









