वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में ईरान की रडार साइट्स को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दुश्मन ठिकानों पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, सबसे पहले होर्मुज क्षेत्र में ईरान के चार अटैक ड्रोन को मार गिराया गया। इसके बाद भविष्य के संभावित हमलों को रोकने के उद्देश्य से गोरुक और केश्म द्वीप स्थित रडार साइट्स पर कार्रवाई की गई।
वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद दुश्मन ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में सात बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं। इनमें से छह मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि सातवीं मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि हालिया अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की मिसाइल क्षमता गंभीर रूप से कमजोर हो गई है। उनके अनुसार ईरान के पास अब केवल 21 से 22 प्रतिशत मिसाइलें ही बची हैं।
हालांकि इस दावे पर सवाल भी उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान ने अपनी 33 में से 30 मिसाइल साइट्स को फिर से सक्रिय कर लिया है और उसके पास अब भी लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार मौजूद है। ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकता है।









