पेरिस। फ्रांस के प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार प्रिक्स गोनकोर्ट की दौड़ में शामिल हैती-कनाडाई लेखक थेलीसन ओरेलियन की किताब C’était ça ou mourir यानी It Was Either That or Die को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया है। लेखक पर आरोप है कि उन्होंने उपन्यास लिखने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली। ओरेलियन ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।
लेखक ने कहा- किताब का काम AI के दौर से पहले शुरू हुआ
ओरेलियन का कहना है कि उन्होंने इस किताब पर 2017 में काम शुरू किया था और 2019 में पहला ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। उनका तर्क है कि उस समय आज की तरह आम लोगों के लिए जनरेटिव AI टूल उपलब्ध नहीं थे।
उन्होंने AI के इस्तेमाल के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उपन्यास में मौजूद भाषा, रूपक, दोहराव और लय उनकी अपनी साहित्यिक शैली का हिस्सा हैं।
गोनकोर्ट अकादमी ने किताब को प्रतियोगिता से हटाया
विवाद के बाद Académie Goncourt ने ओरेलियन की किताब को पुरस्कार की दौड़ से बाहर करने का फैसला किया। अकादमी ने कहा कि उसे AI और अन्य आरोपों से जुड़ी जांचों का संज्ञान है और वह गोनकोर्ट पुरस्कार की साहित्यिक अखंडता को बनाए रखना चाहती है।
अकादमी ने यह भी कहा कि वह AI की मदद से तैयार किए गए साहित्य को बढ़ावा नहीं देना चाहती। गोनकोर्ट की अगली शॉर्टलिस्ट की घोषणा 6 अक्टूबर को होनी है।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक छोटे से अकाउंट ‘Balance ton Claude’ की पोस्ट से शुरू हुआ। इस अकाउंट ने दावा किया कि ओरेलियन के उपन्यास के कई हिस्सों में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं।
बाद में फ्रांस के लेखक और निबंधकार सैमुअल फिटूसी ने बताया कि वह इस अकाउंट से जुड़े लोगों में शामिल थे। उनके मुताबिक, कुछ यूजर्स ने उनसे किताब की जांच करने को कहा था। इसके बाद किताब के अंशों को AI डिटेक्शन टूल Pangram से जांचा गया।
अलग-अलग AI टूल्स ने दिए अलग संकेत
किताब को लेकर AI डिटेक्शन टूल्स के नतीजे भी चर्चा में हैं। रिपोर्टों में Pangram के अलावा दूसरे AI डिटेक्शन सिस्टम के इस्तेमाल का भी जिक्र है। इन परीक्षणों में किताब के कई हिस्सों में AI लेखन की संभावना जताई गई।
हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि AI डिटेक्टर के नतीजों को अकेले निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। ऐसे टूल मानव लेखन को भी AI से लिखा हुआ बता सकते हैं और इनके नतीजे भाषा, शैली और अन्य कारकों से प्रभावित हो सकते हैं।
AI जांच को लेकर भी उठे सवाल
फ्रांस के AI शोधकर्ता थियरी पोइबो ने भी माना कि किताब में AI के इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन उपलब्ध तकनीकी जांच के आधार पर इसे पूरी तरह निश्चित बताना मुश्किल है।
यही वजह है कि यह विवाद सिर्फ एक लेखक की किताब तक सीमित नहीं रह गया है। इससे साहित्य में AI के इस्तेमाल की सीमा, लेखकों की जिम्मेदारी और AI डिटेक्शन टूल्स की विश्वसनीयता को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
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पहले मिला था बड़ा साहित्यिक सम्मान
ओरेलियन की यह पहली किताब है और इसे फ्रांस के साहित्यिक जगत में काफी चर्चा मिली थी। उपन्यास को Prix du Roman Fnac 2026 भी मिला था और यह गोनकोर्ट समेत अन्य प्रमुख साहित्यिक पुरस्कारों की दौड़ में शामिल था। AI विवाद के बाद अब इसकी साहित्यिक यात्रा पर भी सवाल उठने लगे हैं।









