
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के बावजूद तय समय में बिजली बहाल न करने को गंभीर लापरवाही माना है।
UPERC के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की दो सदस्यीय पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जुर्माने की राशि 15 दिनों के भीतर आयोग में जमा कराई जाए।
आयोग के अनुसार, नियमों के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल की जानी चाहिए। लेकिन कई मामलों में उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।
मार्च 2026 में प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया था। आरोप था कि बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लाखों स्मार्ट मीटरों को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिया। बैलेंस माइनस होते ही प्रदेश भर में करीब पांच लाख घरों की बिजली एक साथ कट गई थी।
कई उपभोक्ताओं ने समय पर मीटर रिचार्ज कराया, लेकिन इसके बावजूद बिजली बहाल होने में कई दिनों का समय लग गया। कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को 15 दिन तक बिजली का इंतजार करना पड़ा। इस घटना के बाद मार्च और अप्रैल में प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन और शिकायतों का सिलसिला चला था।
आयोग ने माना कि उपभोक्ताओं को समय पर सेवा उपलब्ध कराना बिजली कंपनियों की जिम्मेदारी है और इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।









