अंबेडकरनगर। ग्राम रोजगार सेवकों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के निकट अंबेडकर प्रतिमा प्रांगण में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया, जिसमें बकाया मानदेय के तत्काल भुगतान की मांग की गई।
19 वर्षों से संविदा पर कार्यरत होने का दावा
संगठन के जिलाध्यक्ष अजीत कुमार ने बताया कि ग्राम रोजगार सेवक, जिन्हें पहले पंचायत मित्र कहा जाता था, पिछले लगभग 19 वर्षों से मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायतों में संविदा पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें प्रशासनिक मद से मानदेय दिया जाता है, लेकिन भुगतान नियमित नहीं हो पाता।
12 से 14 महीने से बकाया मानदेय का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में रोजगार सेवकों का 12 से 14 महीने का मानदेय बकाया है। समय पर भुगतान न होने से आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है। कई सेवकों ने बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और पारिवारिक जरूरतों पर असर पड़ने की बात कही।
स्थायी व्यवस्था और नीति की मांग
ज्ञापन में प्रमुख मांगों में ग्राम पंचायतों में सहायक सचिव या ग्राम विकास सहायक का पद सृजित कर समायोजन, राज्य कर्मचारी का दर्जा और मानव संसाधन नीति (HR Policy) का निर्धारण शामिल रहा।
रोजगार सेवकों ने 4 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में की गई घोषणा के अनुसार न्यूनतम 24,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय तय करने की मांग भी उठाई।









