
नई दिल्ली। देश में थोक महंगाई (WPI) मई महीने में बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26% थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, यह पिछले 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70% दर्ज की गई थी।
मंत्रालय के अनुसार, रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह रही है। अनाज और खाद्य तेलों के दाम भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो महंगाई का दबाव आगे भी बना रह सकता है।
मई में रोजमर्रा की जरूरत वाले सामान यानी प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 3.78% से बढ़कर 4.99% हो गई। वहीं, खाद्य वस्तुओं (फूड इंडेक्स) की महंगाई 3.11% से बढ़कर 4.49% पर पहुंच गई है। फ्यूल और पावर की थोक महंगाई दर में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया, जो अप्रैल के 24.89% से बढ़कर मई में 30.33% हो गई। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर 6.68% से बढ़कर 7.48% दर्ज की गई।
थोक महंगाई सूचकांक (WPI) में प्राइमरी आर्टिकल्स का वेटेज 22.62%, फ्यूल एंड पावर का 13.15% और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का सबसे अधिक 64.23% है। प्राइमरी आर्टिकल्स में खाद्य वस्तुएं, गैर-खाद्य वस्तुएं, मिनरल्स और क्रूड पेट्रोलियम शामिल होते हैं।
इससे पहले मई में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 3.93% पर पहुंच गई थी, जो अप्रैल में 3.48% थी। पिछले पांच महीनों में यह पहली बार है जब रिटेल महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंची है।









