- मोहाली में ट्रांसप्लांट के बाद किडनी हुई फेल
- PGI में इलाज के बावजूद हर तीसरे दिन डायलिसिस
- डायलिसिस के खर्च के लिए जमीन बेचने की नौबत
चंडीगढ़। जिस मां ने अपने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए अपनी किडनी तक दे दी, अब वही परिवार इलाज के बढ़ते खर्च से परेशान है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नजीबाबाद क्षेत्र निवासी अल्ताफ का मोहाली के एक निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट कराया गया था, लेकिन ट्रांसप्लांट के बाद किडनी फेल हो गई।
PGI में भी नहीं सुधरी हालत
अल्ताफ की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद उसके पिता उसे चंडीगढ़ स्थित PGI लेकर पहुंचे। यहां वह करीब आठ दिन तक भर्ती रहा, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
अब उसे हर तीसरे दिन डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। परिवार सस्ती डायलिसिस के लिए PGI पहुंचता है, लेकिन नंबर नहीं आने पर बाहर निजी केंद्र में डायलिसिस करानी पड़ती है।
सस्ती डायलिसिस के लिए भी इंतजार
परिवार के मुताबिक, PGI में डायलिसिस करीब 500 रुपये में हो जाती है। लेकिन अगर नंबर नहीं मिलता तो बाहर निजी सेंटर में इसी प्रक्रिया के लिए करीब 3 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
बार-बार होने वाले इलाज के खर्च ने परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर असर डाला है।
इलाज के लिए जमीन बेचने की नौबत
अल्ताफ के इलाज का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपनी एक बीघा जमीन तक बेचनी पड़ी। अब इलाज और डायलिसिस का खर्च जुटाना परिवार के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
PGI के बाहर अल्ताफ और उसके पिता ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि बीमारी के साथ आर्थिक संकट भी बढ़ता जा रहा है।
अबू धाबी में ड्राइवर रह चुका है अल्ताफ
अल्ताफ नजीबाबाद तहसील क्षेत्र का रहने वाला है। वह करीब पांच साल तक अबू धाबी में ड्राइवर के तौर पर काम कर चुका है।
शुरुआत में उसकी मासिक कमाई करीब 20 हजार रुपये थी, जो भारत लौटने तक बढ़कर करीब 25 हजार रुपये महीना हो गई थी। अल्ताफ की शादी हो चुकी है, लेकिन उसके कोई बच्चे नहीं हैं।









