लखनऊ। महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रॉपर्टी डीलर धीरेंद्र प्रताप सिंह (45) की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, साजिश की नई परतें सामने आ रही हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि धीरेंद्र की हत्या को अंजाम देने के लिए उनके ड्राइवर रवि तिवारी को साजिशकर्ताओं ने पहले ही तीन लाख रुपये दिए थे।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसमें दो लाख रुपये असलहा खरीदने के लिए दिए गए थे, जबकि एक लाख रुपये खर्च के लिए मिले थे। हत्या के बाद रवि को 40 लाख रुपये या फिर उन्नाव के बांगरमऊ में दो दुकानें और 10 लाख रुपये नकद देने का सौदा तय हुआ था।
अमीनाबाद से खरीदा था हत्या में इस्तेमाल असलहा
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या में इस्तेमाल किया गया असलहा उनके ड्राइवर रवि तिवारी ने अमीनाबाद से खरीदा था। इसके लिए साजिशकर्ताओं ने उसे दो लाख रुपये दिए थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि रवि को हत्या से पहले एक लाख रुपये अलग से खर्च के लिए दिए गए थे। इस तरह वारदात को अंजाम देने से पहले उसे कुल तीन लाख रुपये मिल चुके थे।
पुलिस का मानना है कि असलहा खरीदने से लेकर हत्या की साजिश को अंजाम देने तक रवि की भूमिका अहम रही है।
हत्या के बाद 40 लाख या दो दुकान और 10 लाख देने का था सौदा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, धीरेंद्र की हत्या के बाद रवि को 40 लाख रुपये देने की बात तय हुई थी। इसके अलावा विकल्प के तौर पर उन्नाव के बांगरमऊ में दो दुकानें और 10 लाख रुपये नकद देने का भी सौदा हुआ था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम और संपत्ति का सौदा किन लोगों ने तय किया था और इसके पीछे असली साजिशकर्ता कौन हैं।
साथी ओमकार को भी साजिश में किया शामिल
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि रवि तिवारी ने अपने साथी ओमकार को भी साजिश में शामिल किया था। पुलिस ने रवि और उसके साथी से पूछताछ के आधार पर पांच अन्य लोगों को चिह्नित किया है।
इनमें धीरेंद्र की हत्या के लिए सुपारी देने वाले लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इन सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
पांच पुलिस टीमें और एसटीएफ जांच में जुटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए पांच टीमें गठित की हैं। इसके साथ ही स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को भी जांच में लगाया गया है।
एसटीएफ की टीम ने उन्नाव में डेरा डालकर संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस का प्रयास है कि धीरेंद्र की हत्या की पूरी साजिश का खुलासा करते हुए सुपारी देने वालों और वारदात में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचा जाए।









