सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा के आरोपों की जांच कर रही हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी यानी HPEC को बदलने की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि कमेटी ने अभी अपनी जांच शुरू ही की है, ऐसे में उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना फिलहाल जल्दबाजी होगी।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कमेटी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी महज अनुमान पर आधारित हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि HPEC का गठन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करने तथा सुप्रीम कोर्ट की सहायता के लिए किया गया है।
कोर्ट ने कहा- कमेटी किसी एक पक्ष के समर्थन के लिए नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई-पावर्ड कमेटी का उद्देश्य किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं है। कमेटी को पूरे घटनाक्रम की जांच करके तथ्यों को सामने रखना है।
कोर्ट के मुताबिक, जब जांच अभी शुरुआती चरण में है, तब कमेटी के सदस्यों को लेकर पहले से आपत्ति दर्ज करना उचित नहीं होगा। अदालत ने फिलहाल कमेटी को अपना काम करने देने का रुख अपनाया है।
18 अगस्त को बनी थी पांच सदस्यीय HPEC
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड एनक्वायरी कमेटी का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
कमेटी को जंतर-मंतर के अलावा प्रदर्शन से जुड़ी दूसरी जगहों पर हुई हिंसा की भी जांच करनी है। जांच का दायरा केवल प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पुलिस और सुरक्षाबलों से जुड़े आरोपों को भी इसमें शामिल किया गया है।
पुलिस बल के इस्तेमाल और सुरक्षाबलों पर हिंसा की जांच
कमेटी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने के आरोपों की भी जांच करनी है। इसके साथ ही सुरक्षाबलों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों की ओर से हिंसा किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल होगी।









