मानस विहार अपार्टमेंट मामले में एडीए चौकी की पुलिसिंग पर सवाल

चौकी प्रभारी के निलंबन के बाद जांच तेज, घटना वाले दिन दोनों चौकी प्रभारी अपार्टमेंट में मौजूद होने की भी पड़ताल

प्रयागराज। नैनी स्थित मानस विहार अपार्टमेंट में कथित सेक्स रैकेट के मामले में एडीए चौकी प्रभारी लेखपाल सिंह के निलंबन के बाद अब पूरी चौकी की पुलिसिंग जांच के दायरे में आ गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला है कि अपार्टमेंट में यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी। ऐसे में जांच का अहम सवाल यह है कि चौकी क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

चौकी प्रभारी पर कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ा

एडीए चौकी प्रभारी लेखपाल सिंह को मामले में निलंबित किया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, उनके क्षेत्र में कथित गतिविधियां लंबे समय से चलने के बावजूद उन्होंने इसकी जानकारी होने से इनकार किया। प्रथम दृष्टया प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के आधार पर निलंबन के साथ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

अब जांच में यह देखा जा रहा है कि अपार्टमेंट में आने-जाने वालों और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर स्थानीय पुलिस के पास पहले से कोई सूचना थी या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि शिकायत या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई।

घटना वाले दिन अपार्टमेंट में मौजूद थे दोनों चौकी प्रभारी

मामले में घटना वाले दिन की पुलिस मौजूदगी भी जांच का अहम बिंदु बन गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस समय भूपेंद्र सोनी अपार्टमेंट में मौजूद था, उस दौरान एडीए चौकी प्रभारी लेखपाल सिंह भी वहां थे। उनके साथ कांशीराम चौकी प्रभारी रामानंद विश्वकर्मा की मौजूदगी की बात भी सामने आई है।

अधिकारियों ने लेखपाल सिंह से अपार्टमेंट में उनकी मौजूदगी को लेकर पूछताछ की। उनके मुताबिक, अपार्टमेंट में लगातार चोरी की घटनाएं हो रही थीं। इसी वजह से वह गश्त के लिए वहां गए थे।

कांशीराम चौकी प्रभारी ने बताई बॉर्डर एरिया की वजह

वहीं कांशीराम चौकी प्रभारी रामानंद विश्वकर्मा ने अधिकारियों को बताया कि उनका क्षेत्र बॉर्डर एरिया है, इसलिए वह उस इलाके में मौजूद थे।

दोनों चौकी प्रभारियों का एक ही समय पर अपार्टमेंट में मौजूद होना भी अब जांच का हिस्सा है। विभागीय जांच में उनकी मौजूदगी का कारण, उस समय की ड्यूटी और मौके पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

लंबे समय से गतिविधि की जानकारी क्यों नहीं हुई?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुलिस की पूछताछ में अपार्टमेंट में कथित गतिविधियां लंबे समय से चलने की बात सामने आई है तो स्थानीय पुलिस को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अपार्टमेंट में संदिग्ध लोगों की आवाजाही, किरायेदारों और वहां आने-जाने वालों को लेकर पुलिस के पास कोई सूचना थी या नहीं।

फिलहाल विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुलिस स्तर पर किस जगह चूक हुई और जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है।

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