अम्बेडकरनगर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित जनपद स्तरीय ग्रीष्मकालीन कार्यशाला ‘बोधि-पथ’ का शुभारंभ मंगलवार को बीएनकेबी पीजी कॉलेज, अकबरपुर में हुआ। कार्यशाला का आयोजन बौद्ध धर्म-दर्शन, संस्कृति, शिक्षा और पालि भाषा के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से किया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने बौद्ध विरासत के महत्व पर डाला प्रकाश
उद्घाटन समारोह में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। वक्ताओं ने बौद्ध दर्शन, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहीं बीएनकेबी पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. शुचिता पांडे ने कहा कि ‘बोधि-पथ’ बौद्ध अध्ययन और पालि भाषा के संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शैक्षणिक गतिविधियां नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का अवसर प्रदान करती हैं।
युवाओं को मिलेगा अध्ययन और प्रशिक्षण का अवसर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बौद्ध दर्शन, इतिहास और पालि भाषा के अध्ययन का अवसर मिलेगा। इससे युवा पीढ़ी को बौद्ध साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर के विभिन्न आयामों को समझने में मदद मिलेगी।
विषय विशेषज्ञों ने बौद्ध इतिहास और पुरातत्व के अध्ययन को वर्तमान संदर्भों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है।
बौद्ध अध्ययन के प्रचार-प्रसार पर रहेगा जोर
कार्यशाला संयोजक डॉ. शशांक मिश्र ने बताया कि ‘बोधि-पथ’ कार्यक्रम का उद्देश्य बौद्ध विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे समाज और युवाओं तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को बौद्ध अध्ययन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा।









