संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के भाषण के दौरान अपने मोबाइल फोन पर इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह रील्स शेयर करते हुए भी नजर आए। हालांकि, वायरल फुटेज से यह स्पष्ट नहीं होता कि वह किसे रील भेज रहे थे या क्या देख रहे थे।
UNGA में दूसरी बार शामिल हुए अल-शरा
अहमद अल-शरा इस साल दूसरी बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल हुए हैं। 2025 में वह करीब छह दशक बाद UNGA में दुनिया के नेताओं को संबोधित करने वाले सीरिया के पहले प्रतिनिधि बने थे। वह जनवरी 2025 में सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति बने थे। बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद सीरिया में नई अंतरिम सरकार के नेतृत्व की जिम्मेदारी उन्हें मिली।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
अल-शरा के फोन चलाने का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे UN के लंबे राजनीतिक भाषणों के दौरान फोन इस्तेमाल करने से जोड़कर टिप्पणी की। वीडियो में अल-शरा को एर्दोगन के भाषण के दौरान मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रॉल करते देखा जा सकता है।
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ट्रंप के भाषण पर क्यूबा ने किया वॉकआउट
UNGA के दौरान अलग-अलग भाषणों पर राजनयिक विरोध भी देखने को मिला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा को “फेल्ड स्टेट” कहा, जिसके बाद क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल विरोध में सभागार से बाहर चला गया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने ट्रंप के बयान का विरोध करते हुए क्यूबा की संप्रभुता और स्वतंत्रता पर जोर दिया।
एर्दोगन के भाषण के दौरान इजराइली प्रतिनिधिमंडल बाहर निकला
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन के भाषण के दौरान भी इजराइली प्रतिनिधिमंडल सभागार से बाहर निकल गया। एर्दोगन ने अपने संबोधन में गाजा की स्थिति और इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की थी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, एर्दोगन ने UN में सुधार और बहुपक्षीय व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की जरूरत पर भी बात की।
नेतन्याहू का भाषण 24 सितंबर को निर्धारित
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का UNGA में संबोधन 24 सितंबर को निर्धारित है। इसलिए उनके भाषण के दौरान बड़े पैमाने पर वॉकआउट को इस समय हो चुकी घटना के रूप में नहीं लिखा जा सकता।









