मां का साया बचपन में छूटा

खेत-खलिहान से किताबों तक का सफर... अब सिविल सेवा है अगला लक्ष्य

  • अंबेडकरनगर के कालूपुर गांव की निधि उपाध्याय ने जिम्मेदारियों और अभावों के बीच बनाई पहचान
  • रोज 25 किलोमीटर साइकिल चलाकर पूरी की इंटर की पढ़ाई

अंबेडकरनगर। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र के कालूपुर गांव की रहने वाली निधि उपाध्याय का शैक्षणिक सफर संघर्ष और निरंतरता की कहानी है। जन्म के समय ही मां का निधन हो गया। इसके बाद बचपन से ही घर की जिम्मेदारियों के साथ पिता के खेती-किसानी के काम में सहयोग करना पड़ा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई का सिलसिला नहीं टूटने दिया।

इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान निधि रोज करीब 25 किलोमीटर साइकिल चलाकर विद्यालय पहुंचती थीं। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की। साथ ही आजमगढ़ के कॉलेज की मेधा सूची में भी स्थान बनाया।

परिवार में बहन के विवाह के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ीं। बाद में पिता ने दूसरा विवाह किया, लेकिन इन बदलावों का असर निधि की पढ़ाई पर नहीं पड़ा। उन्होंने गांव में रहकर अपनी शिक्षा जारी रखी।

निधि ने अंबेडकरनगर के पंडित राम शब्द स्मृति पीजी कॉलेज, बिशनपुर वजदहा, जहांगीरगंज से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह गांव में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।

संघर्ष के बीच शिक्षा को बनाया प्राथमिकता

घर की जिम्मेदारियों, खेती-किसानी में सहयोग और सीमित संसाधनों के बीच भी निधि ने शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाए रखा। इंटरमीडिएट से लेकर स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उनका पूरा ध्यान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर है।

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