वॉशिंगटन। चीन और रूस के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच अमेरिका अपनी परमाणु नीति में बदलाव की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ऐसी नई रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार (छोटे एटम बम) के इस्तेमाल का विकल्प भी शामिल होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी इस नई नीति को तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान में अमेरिकी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े पैमाने पर परमाणु हमला करने का विकल्प है या फिर कोई परमाणु जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति के जरिए इन दोनों विकल्पों के बीच एक सीमित प्रतिक्रिया का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कम क्षमता वाले परमाणु हथियार होते हैं। इन्हें किसी पूरे शहर को तबाह करने के बजाय युद्ध के मैदान में सैन्य ठिकानों, एयरबेस, मिसाइल लॉन्च साइट, टैंक फॉर्मेशन और सैनिकों की तैनाती जैसे सीमित लक्ष्यों पर इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि भविष्य में यदि चीन या रूस के साथ संघर्ष की स्थिति बनती है, तो केवल बड़े परमाणु हमले का विकल्प पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में छोटे परमाणु हथियारों को सैन्य रणनीति में शामिल करने से सीमित स्तर पर जवाबी कार्रवाई करना आसान होगा और विरोधी पर दबाव बनाया जा सकेगा।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टैक्टिकल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प बढ़ता है, तो इनके वास्तविक उपयोग की आशंका भी बढ़ सकती है। इससे किसी भी पारंपरिक युद्ध के परमाणु संघर्ष में बदलने का जोखिम बढ़ सकता है।









