नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अन्य सिरप आधारित दवाओं की बिक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने ड्रग्स नियमों में संशोधन करते हुए सिरप को उन दवाओं की सूची से हटा दिया है, जिन्हें सीधे मेडिकल स्टोर से खरीदा जा सकता था।
सरकार का कहना है कि इस कदम से सिरप आधारित दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर निगरानी मजबूत होगी। साथ ही निर्माता और विक्रेताओं को लाइसेंसिंग तथा क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सख्त नियमों का पालन करना होगा।
नई व्यवस्था के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची K में बदलाव किया गया है। इस अनुसूची में उन दवाओं को शामिल किया गया था, जिन्हें कुछ नियामकीय छूट प्राप्त थी। अब सिरप को इस सूची से बाहर कर दिया गया है।
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कई अहम कदम उठाए हैं। वर्ष 2022-23 में भारतीय कफ सिरप को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने के बाद सरकार ने निर्यात से पहले अनिवार्य गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था लागू की थी। इसके अलावा दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को भी सख्त किया गया था।
मंत्रालय के अनुसार, इस संशोधन से पहले आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी गई थीं। सरकार का मानना है कि नए नियमों से दवा बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।









