बेंगलुरु में इबोला संदिग्ध महिला की रिपोर्ट निगेटिव

केंद्र सरकार ने कहा- देश में कोई मामला नहीं

  • बेंगलुरु में महिला को एहतियातन आइसोलेशन में रखा गया
  • स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क में आए लोगों की निगरानी बढ़ाई
  • इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में मिला था

बेंगलुरु। बेंगलुरु में इबोला वायरस को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया। सरकार ने कहा कि देश में इबोला वायरस का एक भी मामला नहीं मिला है। यह बयान उस समय सामने आया जब युगांडा से भारत आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण पाए गए थे। हालांकि जांच के बाद महिला की रिपोर्ट निगेटिव आई।

अधिकारियों के अनुसार महिला 23 मई को बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंची थी। एहतियात के तौर पर उसे सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया। महिला को शरीर में हल्का दर्द था, लेकिन अब उसकी हालत पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्कता बढ़ा दी गई है। महिला के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

बताया जा रहा है कि अफ्रीकी देश युगांडा में इबोला संक्रमण के 8 मामले सामने आए हैं। यह वायरस पहले कांगो से फैलकर वहां पहुंचा था।

1976 में पहली बार सामने आया था इबोला वायरस

इबोला वायरस डिजीज (EVD) पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आई थी। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस क्षेत्र के पास इबोला नदी बहती है, उसी के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार इबोला संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। विश्व स्तर पर इस बीमारी में मृत्यु दर 25% से 90% तक देखी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button