
अम्बेडकरनगर। विकासखंड जहांगीरगंज की ग्राम पंचायत तारेम में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती एवं पौधारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यशाला आयोजित की गई। जिला गंगा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उपायों तथा पर्यावरण संरक्षण के संबंध में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी ईशा प्रिया के निर्देश और प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. उमेश तिवारी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला में एलएनएफआई के अध्यक्ष संतोष सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन की पद्धति नहीं है, बल्कि यह मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ी हुई है।
उन्होंने किसानों को खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने की सलाह दी। उनका कहना था कि वनीकरण और प्राकृतिक खेती एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों के माध्यम से भूमि की गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर बनाया जा सकता है। किसानों को यह भी बताया गया कि खेतों को लंबे समय तक खाली छोड़ने के बजाय उनमें हरित आवरण बनाए रखना मिट्टी की उर्वरता के लिए लाभकारी होता है।
रासायनिक मुक्त खेती की जानकारी
कार्यशाला के दौरान किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है। इसके अलावा किसानों को पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।









