यूरोप। इस साल जून से अगस्त के बीच यूरोप में भीषण गर्मी के कारण 50,391 लोगों की मौत होने का अनुमान है। इनमें से 32,619 मौतों के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार माना गया है। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों के अध्ययन के मुताबिक, कोयला, तेल और गैस जलाने से बढ़ते वैश्विक तापमान ने गर्मी को और घातक बना दिया है।
854 शहरों के आंकड़ों का अध्ययन
शोधकर्ताओं ने यूरोप के 854 शहरों के तापमान और मौतों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन शहरों में यूरोप की करीब 40 प्रतिशत आबादी रहती है। अध्ययन के अनुमान के अनुसार, 2022 की तुलना में इस बार गर्मी से होने वाली मौतों में 71 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2022 में गर्मी से 29,480 लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था।
इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में सबसे ज्यादा मौतें
अध्ययन के मुताबिक, गर्मी से सबसे ज्यादा मौतें इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में हुईं। इस दौरान 20 से 44 वर्ष की उम्र के 800 से ज्यादा लोगों की भी जान गई। इससे पता चलता है कि भीषण गर्मी का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है।
15 दिनों में हुईं करीब एक-तिहाई मौतें
शोधकर्ताओं के मुताबिक, 17 जून से 1 जुलाई के बीच गर्मी से हुई कुल मौतों में करीब एक-तिहाई मौतें दर्ज होने का अनुमान है। इस अवधि में तापमान सामान्य से 5.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। तापमान में इस असामान्य बढ़ोतरी ने गर्मी के प्रभाव को और गंभीर बना दिया।
वास्तविक आंकड़ा अधिक होने की आशंका
वैज्ञानिकों का कहना है कि अध्ययन में मई के दौरान आई हीटवेव को शामिल नहीं किया गया है। इसलिए गर्मी से होने वाली वास्तविक मौतों की संख्या इससे अधिक हो सकती है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यूरोप का मौजूदा बुनियादी ढांचा इतनी भीषण गर्मी से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है।
अध्ययन जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बढ़ते तापमान के बीच लोगों को गर्मी से बचाने और शहरों को इसके प्रभावों से निपटने के लिए तैयार करना महत्वपूर्ण है।









