
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी भारतीय हथियारों की लोकप्रियता
- ब्रह्मोस और आकाश सिस्टम को मिल रहे विदेशी ऑर्डर
- रक्षा निर्यात 38 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचा
- फिलीपींस, वियतनाम और अर्मेनिया के साथ बड़े सौदे
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय रक्षा प्रणालियों के प्रभावी प्रदर्शन के बाद दुनिया भर में स्वदेशी हथियारों की मांग तेजी से बढ़ी है। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे भारतीय रक्षा उपकरणों में कई देशों ने रुचि दिखाई है। कुछ देशों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निर्यात सौदे भी हो चुके हैं।
रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड
रक्षा मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 62 प्रतिशत अधिक है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ी मांग
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को लेकर कई देशों की रुचि बढ़ी है।
ब्रह्मोस से जुड़े प्रमुख सौदे
- फिलीपींस के साथ बड़ा रक्षा समझौता
- वियतनाम सहित अन्य देशों से ऑर्डर
- कुल सौदों का मूल्य लगभग 12,500 करोड़ रुपये
- इंडोनेशिया के साथ करीब 3,600 करोड़ रुपये की डील अंतिम चरण में
आकाश मिसाइल सिस्टम को भी मिला समर्थन
भारत के स्वदेशी आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है। अर्मेनिया के साथ लगभग 6,100 करोड़ रुपये का रक्षा सौदा पहले ही हो चुका है।
स्वदेशी रक्षा तकनीक पर बढ़ा भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के अभियानों में भारतीय हथियारों की क्षमता प्रदर्शित होने के बाद विदेशी देशों का भरोसा मजबूत हुआ है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नए अवसर मिल रहे हैं।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि से ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिल रही है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा अर्जित होगी बल्कि देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में रोजगार और निवेश भी बढ़ेगा।









