नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था और अपराध दर के बीच गहरा संबंध है। अपराध में महज 1 प्रतिशत की कमी से वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अल्पकाल में 0.11 प्रतिशत और दीर्घकाल में 0.133 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। यह निष्कर्ष भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिसर्च रिपोर्ट में सामने आया है, जो देश के 28 राज्यों के आंकड़ों के अध्ययन पर आधारित है।
रिपोर्ट के अनुसार कानून-व्यवस्था में सुधार का सीधा सकारात्मक असर आर्थिक विकास पर पड़ता है। अपराध कम होने से निवेश, व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलता है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
एसबीआई रिसर्च ने यह भी पाया कि जब कोई राज्य सरकार प्रति व्यक्ति सुरक्षा खर्च में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी करती है, तो वहां अपराध दर औसतन 0.36 प्रतिशत तक घट जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया गया निवेश सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर लाभदायक साबित होता है।
अध्ययन में निगरानी तंत्र की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। जिन शहरों में सीसीटीवी कैमरों का कवरेज अधिक है, वहां अपराध की घटनाएं अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई हैं। इससे स्पष्ट होता है कि तकनीक आधारित निगरानी अपराध नियंत्रण में प्रभावी भूमिका निभा सकती है।
रिपोर्ट में महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के बीच भी संबंध का उल्लेख किया गया है। जिन क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं अधिक हैं, वहां कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम पाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित माहौल मिलने पर महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ सकती है, जिससे समग्र आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।









