नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां दोनों देशों के लिए आगे और रियायत देना बेहद मुश्किल हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत एक तरह के ‘प्लेटो’ पर पहुंच गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत अभी खत्म नहीं हुई है और आगे कोई गुंजाइश बनती है तो दोनों पक्ष उस पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
सीतारमण ने कहा कि यह समझौता काफी कठिन और लंबे समय से चल रही बातचीत का परिणाम है। मौजूदा स्थिति में दोनों पक्षों के लिए और कुछ देना या लेना ‘बहुत, बहुत मुश्किल’ हो सकता है। हालांकि, अगर बातचीत के लिए कोई नया रास्ता या गुंजाइश निकलती है तो भारत और अमेरिका आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं।
व्यापार असंतुलन बना अहम मुद्दा
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संतुलन फिलहाल भारत के पक्ष में है। अमेरिका इस असंतुलन को कम करना चाहता है और इसी वजह से बातचीत में यह मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है। दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर लंबे समय से चर्चा चल रही है।
भारत और अमेरिका फरवरी 2025 से व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते को लेकर भी बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक अंतिम डील पर सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर भी पिछले सप्ताह कह चुके हैं कि फिलहाल समझौता तत्काल होने की स्थिति में नहीं है, हालांकि बातचीत जारी है।
आगे रास्ता निकला तो बातचीत जारी रहेगी
सीतारमण के बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर किसी मुद्दे पर आगे बढ़ने की गुंजाइश बनती है तो दोनों पक्ष उस रास्ते पर विचार कर सकते हैं।
ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि भारत और अमेरिका लंबित मुद्दों पर किस तरह समझौता करते हैं और क्या आगे बातचीत के जरिए ट्रेड डील को अंतिम रूप देने का रास्ता निकल पाता है।
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