
- दिल्ली में शुरू हुई भारत-अमेरिका की हाई लेवल ट्रेड वार्ता
- अंतरिम व्यापार समझौते को कानूनी रूप देने पर फोकस
- मार्केट एक्सेस और निवेश बढ़ाने पर होगी चर्चा
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए सोमवार से नई दिल्ली में चार दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो रही है। इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारी अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम कानूनी रूप देने के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर भी चर्चा करेंगे।
दोनों देशों के मुख्य वार्ताकार आमने-सामने
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच कर रहे हैं, जबकि भारतीय पक्ष की कमान वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और मुख्य वार्ताकार दर्पन जैन के हाथों में है। दोनों पक्ष व्यापार और निवेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
इन मुद्दों पर होगी बातचीत
बैठक के दौरान निम्न प्रमुख विषयों पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी:
- मार्केट एक्सेस
- नॉन-टैरिफ बाधाएं
- कस्टम्स सहयोग
- ट्रेड फैसिलिटेशन
- निवेश प्रोत्साहन
- आर्थिक सुरक्षा सहयोग
- व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA)
फरवरी में तैयार हुआ था समझौते का ढांचा
भारत और अमेरिका ने इसी वर्ष फरवरी में अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति बनाई थी। इसके तहत अमेरिका भारत पर लगने वाले कुछ टैरिफ में कमी करने को तैयार हुआ था। हालांकि बाद में अमेरिकी प्रशासन द्वारा टैरिफ नीति में बदलाव के कारण वार्ता की प्रक्रिया प्रभावित हुई और समझौते की शर्तों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो गया।
बदले हालात में होगी नई गणना
अमेरिका की नई टैरिफ नीति लागू होने के बाद दोनों देशों को प्रस्तावित समझौते की शर्तों और लाभों का दोबारा आकलन करना पड़ रहा है। इसी वजह से अब दिल्ली में होने वाली यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत का बड़ा खरीद प्रस्ताव
मौजूदा फ्रेमवर्क के तहत भारत ने अमेरिका के कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम करने या हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसके बदले भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 बिलियन डॉलर (करीब 47 लाख करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने की इच्छा जताई है।
इनमें शामिल हैं:
- ऊर्जा उत्पाद
- विमान और विमान पुर्जे
- कीमती धातुएं
- टेक्नोलॉजी उत्पाद
- कोकिंग कोल
व्यापारिक रिश्तों को मिल सकती है नई मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक अंतिम रूप लेता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों और उद्योगों को भी नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।









