नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव ने आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। जिन कार्यों के लिए पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी, अब वे AI टूल्स की मदद से कम समय और कम संसाधनों में पूरे किए जा रहे हैं।
एचआर कंपनी टीमलीज के अनुसार, देश की करीब 40 फीसदी कंपनियां अब डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानने लगी हैं। वहीं नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 82 फीसदी BCA और MCA ग्रेजुएट्स के पास AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक, भविष्य में वही कर्मचारी ज्यादा सफल होंगे जो AI का उपयोग कर अपनी उत्पादकता में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकें। वहीं IBM इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू का कहना है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, बल्कि AI का प्रभावी उपयोग करने वाले लोग दूसरों की जगह ले सकते हैं।
टेक और एचआर विशेषज्ञ पंकज बंसल का कहना है कि पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी, लेकिन यदि पढ़ाई का तरीका और पाठ्यक्रम समय के साथ नहीं बदला गया तो उनकी उपयोगिता तेजी से कम हो जाएगी। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे AI टूल्स सीखने के साथ लाइव प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और व्यावहारिक अनुभव पर फोकस करें।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में केवल डिग्री नहीं बल्कि स्किल, प्रैक्टिकल नॉलेज और AI की समझ नौकरी पाने और करियर में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी शर्त होगी। AI के दौर में निर्णय क्षमता, संचार कौशल, इमोशनल इंटेलिजेंस और समस्या समाधान जैसी मानवीय खूबियां सबसे अधिक मूल्यवान बनेंगी।









