अम्बेडकरनगर। जैतपुर गांव में आयोजित 31वें सामाजिक परिवर्तन दिवस समारोह में सामाजिक बदलाव, शिक्षा और जागरूकता को लेकर विचार साझा किए गए। समारोह में महाराष्ट्र से आए धम्म विशेषज्ञ भंते उपाली उमेश बाबू ने कहा कि गलत जानकारी के साथ पढ़ा-लिखा होना, अनपढ़ होने से भी अधिक खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बात को बिना परखे स्वीकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ मूल विचारों में कई तरह के बदलाव और व्याख्याएं जुड़ती चली गईं, जिससे मूल संदेश प्रभावित हुआ है।
शिक्षा और सत्य की जांच पर दिया जोर
धम्म विशेषज्ञ ने कहा कि समाज में सही समझ और तर्क आधारित सोच जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाषा बदलने से विचार का मूल अर्थ नहीं बदलता, लेकिन गलत व्याख्या और मिलावट से भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने धम्म शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए पाठशालाओं के विस्तार की बात भी रखी।
सामाजिक असमानता और शिक्षा पर चर्चा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज में व्याप्त असमानता, भेदभाव और कुरीतियों को दूर करने पर जोर दिया। कहा गया कि शिक्षा और संगठन सामाजिक परिवर्तन की सबसे मजबूत आधारशिला हैं। जब तक समाज का हर वर्ग शिक्षित और जागरूक नहीं होगा, तब तक वास्तविक बदलाव संभव नहीं है।









