प्रयागराज। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य की ओर से ब्राह्मण समाज की कुछ उपजातियों को लेकर की गई कथित टिप्पणी का मामला अब प्रयागराज की अदालत पहुंच गया है। एसीजेएम-8 अदालत ने शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय के परिवाद पर मामले को दर्ज करने का आदेश दिया है और रामभद्राचार्य को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
मामला 3 फरवरी 2024 को वृंदावन में आयोजित भागवत कथा के दौरान दिए गए कथित बयान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रामभद्राचार्य ने उपाध्याय, पाठक, चौबे, त्रिगुणायत और दीक्षित जैसे ब्राह्मण उपनामों या उपजातियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
याचिकाकर्ता ने सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित होने का आरोप लगाया
शिकायतकर्ता सुरेश चंद्र उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि इस कथित बयान से संबंधित समाज के लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। उनका दावा है कि बयान के बाद उपाध्याय समाज के लोगों को सामाजिक स्तर पर परेशानी का सामना करना पड़ा और विवाह संबंधों में भी दिक्कतें आने लगीं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, रामभद्राचार्य की धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण उनके बयान का लोगों पर प्रभाव पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से कानूनी कार्रवाई की मांग की।
क्या कहा था रामभद्राचार्य ने?
परिवाद के मुताबिक, वृंदावन की भागवत कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने कुछ ब्राह्मण उपजातियों को लेकर टिप्पणी की थी। शिकायत में उनके हवाले से कहा गया है कि उपाध्याय, चौबे, त्रिगुणायत, दीक्षित और पाठक जैसे परिवारों में ऊंचे कुल के लोग अपनी बेटियां नहीं देते।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने इन समूहों को विद्यार्थियों से पैसे लेकर पढ़ाने के संदर्भ में ‘अधम’ बताया था। बयान का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ।
पहले भी हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
इसी विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में सितंबर 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने सीधे एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए याची को उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया अपनाने की छूट दी थी। इसके बाद अब प्रयागराज की निचली अदालत में परिवाद के जरिए मामला आगे बढ़ा है।
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12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
प्रयागराज की एसीजेएम-8 अदालत ने रामभद्राचार्य को नोटिस जारी करते हुए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है। अदालत में आगे की प्रक्रिया शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर चलेगी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत में शिकायत पर मामला आगे बढ़ना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।









