
- बसखारी में पद्मश्री शायर डॉ. बशीर बद्र की स्मृति में साहित्यिक संध्या
- शायरों और साहित्य प्रेमियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
- ग़ज़लों के माध्यम से याद किए गए बशीर बद्र के साहित्यिक योगदान
अम्बेडकरनगर। उर्दू ग़ज़ल को नई पहचान देने वाले पद्मश्री सम्मानित शायर डॉ. बशीर बद्र की स्मृति में रविवार रात बसखारी में विशेष साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। आजमगढ़ रोड स्थित नरगिस प्लाजा में बज़्मे सुख़न बसखारी के तत्वावधान में आयोजित “एक शाम डॉ. बशीर बद्र के नाम” कार्यक्रम में शायरों, कवियों और साहित्य प्रेमियों ने उनकी साहित्यिक सेवाओं को याद किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चिकित्सक डॉ. शोएब अख्तर ने की, जबकि संचालन सितारे उर्दू अवार्ड से सम्मानित शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने किया। कार्यक्रम के संयोजक कुमैल अहमद सिद्दीकी रहे।
ग़ज़ल को आम लोगों तक पहुंचाने में रही अहम भूमिका
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र ने उर्दू ग़ज़ल को केवल साहित्यिक मंचों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे आम जनमानस की भाषा और भावनाओं से जोड़ा। उनकी शायरी में रिश्तों की गर्माहट, बिछड़ने का दर्द, तन्हाई और जिंदगी के अनुभव सहज रूप से दिखाई देते हैं।
डॉ. शोएब अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र की रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सरल अभिव्यक्ति और गहरी संवेदनशीलता रही। यही कारण है कि उनके शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
कुमैल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि उनकी ग़ज़लों ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी रचनाएं पीढ़ियों तक साहित्य प्रेमियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी।
शायरों ने कलाम के जरिए दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में महाराष्ट्र से पहुंचीं शायरा चांदनी मुस्कान, शगुफ्ता लखनवी, इंसाफ टांडवी, अहमद सईद टांडवी, मतलूब टांडवी, कुमैल डोंडवी, अबूसाद भूलेपुरी, अकरम भूलेपुरी, कमर जीलानी टांडवी, मजाहिर टांडवी और रिजवान टांडवी सहित कई शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश किए।









