
- सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को बताया संवैधानिक
- चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण का अधिकार मान्य
- हटाए गए वोटरों की सूची 4 हफ्ते में केंद्र को भेजने का आदेश
पटना। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है और इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।
कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों के नाम चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार को भेजे जाएं। अदालत ने माना कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए आयोग आवश्यक कदम उठा सकता है।
चुनाव आयोग ने लगभग 11 महीने पहले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया। वहीं असम में स्पेशल रिवीजन (SR) प्रक्रिया लागू की गई थी।
जानकारी के अनुसार इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। बिहार SIR से जुड़ा मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। बाद में अन्य राज्यों से भी इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दायर की गईं।









