दिग्विजय सिंह की जमीन पर दाखिल-खारिज अर्जी खारिज

अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से जुड़ी जमीन के विवाद में नायब तहसीलदार कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आलापुर तहसील स्थित भूमि के दाखिल-खारिज के लिए प्रस्तुत अर्जी को साक्ष्य के अभाव में खारिज कर दिया गया है।

यह प्रकरण आलापुर तहसील क्षेत्र के रामनगर महुवर गांव के गाटा संख्या 1235 क से संबंधित है। करीब 0.152 हेक्टेयर क्षेत्रफल की यह भूमि वर्तमान में दिग्विजय सिंह के नाम दर्ज है। बताया गया कि पहले यह जमीन उनकी मां के नाम थी और 18 मई 2024 को वरासत के आधार पर उनके नाम दर्ज की गई थी। भूमि की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये आंकी गई है।

1989 के कथित बैनामे से शुरू हुआ विवाद

विवाद की जड़ वर्ष 1989 में हुए एक कथित बैनामे से जुड़ी है। आरोप है कि हंसवर क्षेत्र के ग्राम क्वेटला निवासी रामहरक चौहान ने खुद को दिग्विजय सिंह का मुख्तार-ए-आम बताते हुए उक्त भूमि जियालाल, राजबहादुर और मंगली के नाम कर दी थी।

मामला तब प्रकाश में आया जब फरवरी 2025 में जमीन पर निर्माण कार्य शुरू किया गया। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री के केयरटेकर अनिल यादव ने जिला प्रशासन से शिकायत की। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच कराई गई।

जांच में हस्ताक्षर और नाम में विसंगति

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मुख्तार-ए-आम तैयार करते समय नाम और हस्ताक्षर में विसंगति पाई गई। बताया गया कि दिग्विजय सिंह के स्थान पर ‘दुर्विजय सिंह’ नाम का प्रयोग किया गया था। पते में भी अंतर मिलने की बात कही गई। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी। फर्जी मुख्तार-ए-आम से जुड़े प्रकरण की कार्रवाई अभी लंबित बताई जा रही है।

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