बसखारी में कर्बला का संदेश गूंजा, इंसानियत और न्याय पर केंद्रित रहा कार्यक्रम

‘ज़िक्र शोहदा-ए-कर्बला’ में वक्ताओं ने बताया—कर्बला सिर्फ इतिहास नहीं, जीवन की सीख है

अंबेडकरनगर। आजमगढ़ रोड स्थित बसखारी में बज़्मे सुख़न के तत्वावधान में “ज़िक्र शोहदा-ए-कर्बला” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयोजन कुमैल अहमद सिद्दीकी के संयोजन में हुआ। अध्यक्षता हकीम इरफान आजमी ने की। संचालन मोहम्मद असलम खान ने किया। शुरुआत अहमद सईद टांडवी की नाते पाक से हुई।

कार्यक्रम में कर्बला की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े संदेशों पर विस्तार से विचार रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि कर्बला केवल एक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा का मजबूत संदेश है।

सत्य, न्याय और त्याग का प्रतीक है कर्बला

अध्यक्ष हकीम इरफान आजमी ने कहा कि कर्बला की घटना हर दौर में समाज को सही दिशा दिखाती है। उन्होंने कहा कि यह घटना सिद्धांतों पर अडिग रहने, धैर्य रखने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देती है।

संचालक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि इमाम हुसैन का संदेश यह है कि अन्याय के सामने समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह विचार समाज में नैतिक मजबूती और एकता को बढ़ाता है।

संयोजक कुमैल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि वर्तमान समय में कर्बला की शिक्षाओं को अपनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शायरी और कलाम से भावपूर्ण हुआ माहौल

कार्यक्रम में शायरों ने कर्बला के बलिदान और इंसानियत के संदेशों को अपने कलाम के जरिए प्रस्तुत किया। इसमें इंसाफ टांडवी, डॉ. दस्तगीर टांडवी, अकरम भूलेपुरी, कमर जीलानी टांडवी, सेराज अनवर टांडवी, कुमैल डोंडवी, सईद टांडवी, मजाहिर टांडवी, सैयद फ़राज़ अशरफ और डॉ. सब्बू सहित कई साहित्यकार शामिल रहे।

कलाम के दौरान शोहदा-ए-कर्बला के त्याग और संदेशों को प्रभावी ढंग से पेश किया गया। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम को गंभीरता से सुना।

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