मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी। राहुल गांधी ने 2019 में जारी मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन और उनके खिलाफ शुरू की गई कानूनी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की थी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने निचली अदालत में मानहानि की शिकायत पर सुनवाई छह हफ्ते तक टालने का आदेश बढ़ा दिया है। ऐसे में इस अवधि के दौरान राहुल गांधी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं होना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मांगा समय
राहुल गांधी के वकील सुदीप पसबोला और कुशल मोर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की। शिकायतकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि मामला 2021 से रुका हुआ है।
राफेल डील पर ‘चौकीदार चोर है’ बयान
यह मामला राहुल गांधी के 2018 में राजस्थान की एक सभा में दिए गए बयान से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने राफेल विमान सौदे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी की थी।
इसके अलावा आरोप है कि राहुल गांधी ने 24 सितंबर को X पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने मोदी को ‘कमांडर-इन-थीफ’ यानी ‘चोरों का सरदार’ कहा था।
2019 में शुरू हुई थी कानूनी प्रक्रिया
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 28 अगस्त 2019 को मानहानि की शिकायत पर राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। राहुल गांधी ने इसी आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
शिकायतकर्ता बोले- BJP कार्यकर्ता आहत हुए
शिकायतकर्ता एमएच श्रीश्रीमल ने खुद को BJP का सक्रिय सदस्य बताया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BJP का प्रमुख चेहरा हैं और राहुल गांधी की टिप्पणी से वह तथा पार्टी के अन्य सदस्य आहत हुए। इसी आधार पर उन्होंने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई।
राहुल के वकील बोले- बयान BJP के खिलाफ नहीं
राहुल गांधी के वकीलों ने दलील दी कि टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ थी, BJP के खिलाफ नहीं। इसलिए शिकायतकर्ता को इस आधार पर मानहानि का केस दर्ज कराने का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि BJP के सदस्यों का एक निश्चित समूह है और प्रधानमंत्री पार्टी का प्रमुख चेहरा हैं। ऐसे में टिप्पणी का असर पार्टी के सदस्यों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वास्तव में बयान से BJP सदस्यों को नुकसान या ठेस पहुंची या नहीं, इसका फैसला ट्रायल के दौरान सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर होगा।









