ट्रम्प बोले- होर्मुज की सुरक्षा का खर्च दूसरे देश उठाएं, अमेरिका को दें भुगतान

  • ट्रम्प ने ईरान संघर्ष में मदद नहीं करने वाले देशों से भुगतान की मांग की
  • होर्मुज की सुरक्षा के लिए पहले 7 देशों से मदद मांग चुके हैं अमेरिकी राष्ट्रपति
  • ईरान के जल्द समझौते की कोशिश करने का भी ट्रम्प ने किया दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा का खर्च उन देशों को उठाना चाहिए, जिन्हें इस समुद्री रास्ते से तेल और गैस की आवाजाही का फायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका की मदद नहीं की, उन्हें संकट खत्म होने के बाद अमेरिका को भुगतान करना चाहिए।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका कई पीढ़ियों से अपने हितों की जगह दूसरे देशों के लिए ज्यादा काम करता रहा है। उनके मुताबिक, जो देश मौजूदा संकट में अमेरिका के साथ खड़े नहीं हुए, उन्हें इसकी कीमत चुकानी चाहिए।

7 देशों से मदद मांग चुके हैं ट्रम्प

ईरान के खिलाफ संघर्ष शुरू होने के बाद ट्रम्प पहले ही कई देशों से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में सहयोग की मांग कर चुके हैं। 16 मार्च को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया था कि अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा के लिए 7 देशों से संपर्क किया है। हालांकि, उस समय उन्होंने इन देशों के नाम सार्वजनिक नहीं किए थे।

इससे पहले ट्रम्प ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से होर्मुज की सुरक्षा में अमेरिका का साथ देने की उम्मीद जताई थी।

होर्मुज से गुजरता है तेल-गैस का बड़ा कारोबार

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां से बड़ी संख्या में तेल और गैस ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं।

ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की बाधा का असर तेल और गैस की कीमतों के साथ कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

ट्रम्प बोले- ईरान समझौता करना चाहता है

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है और जल्द समझौता करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत करेगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला वही करेंगे।

उन्होंने कहा कि होर्मुज से तेल की आवाजाही से जिन देशों को आर्थिक फायदा मिल रहा है, उन्हें इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा का खर्च भी उठाना चाहिए।

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