- संविधान पीठ के सामने 25 मामले लंबित
- दो केस 16 साल पहले रेफर हुए
- आरक्षण, चुनाव और निजता से जुड़े मुद्दे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में व्यापक संवैधानिक महत्व से जुड़े 25 मामले संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के इंतजार में लंबित हैं। इनमें पंजाब में सिखों के अल्पसंख्यक दर्जे और राइस मिलर्स व भारतीय खाद्य निगम (FCI) के विवाद से जुड़े दो मामले शामिल हैं। ये दोनों केस 16 साल पहले संविधान पीठ को रेफर किए गए थे, लेकिन अब तक इनकी सुनवाई के लिए संविधान पीठ गठित नहीं हुई है।
चार मामले 10 साल से ज्यादा पुराने
इन 25 मामलों में चार ऐसे केस भी हैं, जो 10 साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं। संविधान पीठ को भेजे जाने से पहले इनमें से कई मामले वर्षों तक छोटी पीठों के सामने भी लंबित रहे थे। इन मामलों में संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या और उनके दायरे से जुड़े अहम सवालों पर फैसला होना है।
आरक्षण से लेकर डिजिटल निजता तक के मुद्दे
लंबित मामलों में चार आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े हैं। नौकरी, चुनाव, केंद्र-राज्य के अधिकार और आर्थिक विवादों से संबंधित तीन-तीन मामले हैं। धर्म और संस्कृति से जुड़े दो मामले भी सुनवाई की प्रतीक्षा में हैं। इसके अलावा मुस्लिम आरक्षण, मुस्लिम विवाह, महिलाओं के संपत्ति अधिकार और डिजिटल निजता जैसे विषयों पर भी संवैधानिक सवालों का समाधान होना बाकी है।
राज्यपाल-स्पीकर के अधिकारों पर भी फैसला बाकी
संविधान पीठ को आरक्षण, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के अधिकारों तथा निजता जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों का जवाब तय करना है। सुप्रीम कोर्ट में नियमित संविधान पीठ गठित करने की मांग समय-समय पर उठती रही है। न्यायाधीश भी अलग-अलग अवसरों पर इस व्यवस्था की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।









