वॉशिंगटन। अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के छह नेताओं ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। ये सभी डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं। इनमें चार मौजूदा सांसदों ने अपनी सीट बरकरार रखी, जबकि पीया दांडिया और अमीश शाह ने पहली बार जीत दर्ज की।
जीतने वाले नेताओं में एमी बेरा, रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम, पीया दांडिया और अमीश शाह शामिल हैं। वर्ष 2024 के चुनाव में भी छह भारतवंशी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे। इस बार नए चेहरों की जीत और पुराने सांसदों की वापसी से अमेरिकी संसद में भारतीय मूल के नेताओं की मौजूदगी बनी रहेगी।
1. एमी बेरा: आठवीं बार सांसद बने
कैलिफोर्निया के तीसरे संसदीय क्षेत्र से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी बेरा लगातार आठवीं बार सांसद चुने गए हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को 23 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। बेरा पेशे से डॉक्टर हैं और 2012 में पहली बार अमेरिकी संसद के लिए चुने गए थे।
एमी बेरा का परिवार अमेरिका में होटल कारोबार से जुड़ा रहा है। बचपन में वह वीकेंड और छुट्टियों के दौरान अपने माता-पिता के होटल में काम करते थे। इस दौरान उन्होंने होटल के छोटे-मोटे काम सीखे और कारोबार को करीब से समझा।
बेरा का जन्म लॉस एंजिल्स में गुजराती प्रवासी माता-पिता के घर हुआ था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों से जुड़ी समिति में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
2. रो खन्ना: कैलिफोर्निया से फिर जीते
रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर जीत दर्ज की है। इस सीट में सिलिकॉन वैली के कुछ हिस्से भी शामिल हैं। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और भारतीय मूल के कारोबारी रितेश टंडन को 42 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया।
रो खन्ना अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वह तकनीक, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। उनकी जीत से प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर उनकी भूमिका बनी रहेगी।
3. प्रमिला जयपाल: छठी बार प्रतिनिधि सभा पहुंचीं
प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के सातवें संसदीय क्षेत्र से दोबारा जीत हासिल की है। वह 2016 में पहली बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी गई थीं। इस जीत के साथ वह छठी बार संसद पहुंचेंगी।
प्रमिला जयपाल का जन्म 1965 में चेन्नई में हुआ था। 16 साल की उम्र में वह पढ़ाई के लिए अमेरिका गई थीं। उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की और बाद में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।
राजनीति में आने से पहले वह अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय थीं। उन्होंने वॉशिंगटन में प्रवासियों के अधिकारों के लिए काम करने वाला संगठन OneAmerica भी स्थापित किया था। अमेरिकी संसद में वह आव्रजन, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे उठाती रही हैं।
4. सुहास सुब्रमण्यम: दूसरी बार जीते
वर्जीनिया के दसवें संसदीय क्षेत्र से सुहास सुब्रमण्यम ने दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराया। सुब्रमण्यम पेशे से वकील और उद्यमी हैं।
उन्होंने तकनीकी स्टार्टअप के साथ काम किया और अपना कारोबार भी शुरू किया। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में वह व्हाइट हाउस में तकनीकी नीति सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं।
कांग्रेस पहुंचने से पहले सुहास वर्जीनिया की राज्य विधानसभा और राज्य सीनेट के सदस्य रह चुके हैं। उनकी दोबारा जीत से अमेरिकी संसद में उनकी राजनीतिक भूमिका और मजबूत हुई है।
5. पीया दांडिया: पहली बार प्रतिनिधि सभा पहुंचीं
पीया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल कर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। वह भारतीय मूल के परिवार से आती हैं और फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में पली-बढ़ी हैं।
राजनीति में आने से पहले पीया शिक्षा के क्षेत्र में काम करती थीं। वह शिक्षक और हाईस्कूल प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाईस्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई थी।
उनकी जीत को फ्लोरिडा से भारतीय मूल के प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
6. अमीश शाह: एरिजोना से पहली बार पहुंचे संसद
अमीश शाह ने एरिजोना के पहले संसदीय क्षेत्र से जीत दर्ज की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार और पूर्व NFL खिलाड़ी जे फेली को हराया। इस जीत के साथ वह एरिजोना से अमेरिकी कांग्रेस पहुंचने वाले पहले भारतीय-अमेरिकी नेता बने हैं।
अमीश शाह पेशे से इमरजेंसी फिजिशियन यानी आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ हैं। वह इससे पहले एरिजोना की राज्य विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। 2024 में भी उन्होंने इसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
इस बार उन्होंने वापसी करते हुए जीत हासिल की और भारतीय मूल के उन छह नेताओं में शामिल हो गए, जिन्होंने प्रतिनिधि सभा में जगह बनाई है।









