नई दिल्ली। आने वाले दिनों में हवाई यात्रा यात्रियों के लिए महंगी पड़ सकती है। ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म मैकिंजी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक सप्लाई संकट के कारण एयरलाइंस कंपनियों की लागत में भारी वृद्धि हो रही है, जिसका असर टिकटों की कीमतों पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, जियोपॉलिटिकल तनाव और रिफाइनरी उत्पादन में कमी के चलते जेट फ्यूल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। एयरलाइंस कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत होती है। ऐसे में फ्यूल महंगा होने से टिकटों के दाम में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
मैकिंजी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जेट फ्यूल के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले ‘क्रैक स्प्रेड’ में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। क्रैक स्प्रेड कच्चे तेल और उससे तैयार होने वाले फ्यूल उत्पादों की कीमतों के अंतर को कहा जाता है। सामान्य तौर पर यह 20 डॉलर प्रति बैरल या उससे कम रहता है, लेकिन वर्ष 2026 में इसके औसतन 50 डॉलर प्रति बैरल से अधिक पहुंचने का अनुमान है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, खाड़ी देशों और एशियाई बाजारों से जेट फ्यूल के निर्यात में गिरावट भी संकट की बड़ी वजह है। दुनिया के कुल जेट फ्यूल सप्लाई का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों से आता है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद भारत, चीन और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों ने ईंधन निर्यात पर आंशिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।









