अम्बेडकरनगर। भाजपा में नए जिलाध्यक्ष दिलीप देव पटेल की नियुक्ति को 10 दिन पूरे होने के बाद जिले की राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। संगठन में शुरुआती औपचारिकताओं के बाद अब असली फोकस जिला कमेटी और मंडल इकाइयों के पुनर्गठन पर है। इसी प्रक्रिया ने जिले के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
संगठन ढांचे का ‘री-इंजीनियरिंग फेज’, पुराने समीकरण दबाव में
सूत्रों के अनुसार जिला संगठन अब री-इंजीनियरिंग चरण में प्रवेश कर चुका है। कई स्तरों पर पद रिक्त हैं, जबकि कुछ जगह पुरानी पकड़ अब भी प्रभावी बनी हुई है। इसी असंतुलन के कारण नई टीम का गठन सिर्फ प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति पुनर्वितरण की प्रक्रिया बन गया है।
पार्टी के अंदर यह माना जा रहा है कि जो भी टीम बनेगी, वही 2027 विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार करेगी।
पर्यवेक्षक सक्रिय, हर नाम पर हो रहा ‘स्क्रीनिंग टेस्ट’
संगठनात्मक पुनर्गठन के लिए नियुक्त पर्यवेक्षक गोविंद नारायण शुक्ल की भूमिका अब निर्णायक मानी जा रही है। जिला कार्यसमिति और मंडल इकाइयों के गठन को लेकर नामों की स्क्रीनिंग तेज हो गई है।
सूत्र बताते हैं कि चयन प्रक्रिया में केवल सक्रियता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और संगठनात्मक संतुलन को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
‘पदों की दौड़’ ने पकड़ी रफ्तार, लॉबी सक्रिय
जिला कमेटी के संभावित पदों को लेकर दावेदारों की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। जिला उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री और मीडिया प्रभारी जैसे पदों के लिए स्थानीय स्तर से लेकर लखनऊ तक संपर्क अभियान चल रहा है।
संगठन के भीतर यह स्थिति स्पष्ट संकेत दे रही है कि यह केवल नियुक्ति प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रभाव क्षेत्र विस्तार की रणनीतिक दौड़ है।









