- SBI में कार लोन की ब्याज दर 9.10% सालाना, Union Bank में 7.90% से शुरू
- लंबी अवधि का लोन लेने पर कुल ब्याज का बोझ बढ़ जाता है
- क्रेडिट स्कोर, डाउन पेमेंट और प्रोसेसिंग फीस का भी रखें ध्यान
अगर आप इन दिनों कार खरीदने की योजना बना रहे हैं और इसके लिए लोन लेने वाले हैं, तो सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना जरूरी है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI इस समय 9.10% सालाना ब्याज पर कार लोन दे रहा है, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ब्याज दर 7.90% से शुरू है।
हालांकि, आपको मिलने वाली वास्तविक ब्याज दर बैंक की शर्तों, क्रेडिट प्रोफाइल और लोन की अवधि के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए सिर्फ शुरुआती ब्याज दर देखकर बैंक चुनने के बजाय कुल लागत की भी जांच करनी चाहिए।
ज्यादा लंबी अवधि का मतलब ज्यादा ब्याज
कार लोन की अवधि जितनी लंबी होगी, आमतौर पर कुल ब्याज का भुगतान उतना ही ज्यादा करना पड़ेगा। कार लोन अधिकतम 8 साल तक की अवधि के लिए लिया जा सकता है। हालांकि 7 से 8 साल की लंबी अवधि वाले लोन पर ब्याज दर 3 से 4 साल की अवधि वाले लोन की तुलना में करीब 0.50% तक अधिक हो सकती है।
कम अवधि चुनने पर EMI बढ़ सकती है, लेकिन कुल ब्याज का बोझ कम हो जाता है। इसलिए अपनी आय के हिसाब से ऐसी अवधि चुनना बेहतर है जिसमें EMI भी संभाली जा सके और ब्याज भी कम देना पड़े।
8% ब्याज पर 10 लाख के लोन की EMI
अगर ₹10 लाख का कार लोन 8% सालाना ब्याज पर लिया जाए, तो अवधि के हिसाब से EMI और कुल ब्याज में बड़ा अंतर आता है।
| ब्याज दर | अवधि | लोन राशि | अनुमानित EMI | कुल भुगतान | कुल ब्याज |
|---|---|---|---|---|---|
| 8% | 7 साल | ₹10 लाख | ₹15,586 | ₹13.09 लाख | ₹3.09 लाख |
| 8% | 5 साल | ₹10 लाख | ₹20,276 | ₹12.17 लाख | ₹2.17 लाख |
| 8% | 3 साल | ₹10 लाख | ₹31,336 | ₹11.28 लाख | ₹1.28 लाख |
नोट: ये कैलकुलेशन अनुमानित हैं। वास्तविक EMI और कुल भुगतान बैंक की शर्तों और ब्याज गणना के आधार पर अलग हो सकते हैं।
क्रेडिट स्कोर से भी तय होती है ब्याज दर
कार लोन पर मिलने वाली ब्याज दर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी निर्भर कर सकती है। अच्छा क्रेडिट स्कोर होने पर कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अलावा नियमित आय वाले आवेदकों को भी बैंक बेहतर शर्तों पर लोन दे सकते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर और बैंक की पात्रता शर्तें जरूर जांच लें।
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कम डाउन पेमेंट से बढ़ सकता है ब्याज का बोझ
कम डाउन पेमेंट करना शुरुआत में आकर्षक लग सकता है, क्योंकि आपके पास ज्यादा नकदी बच जाती है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आपको ज्यादा रकम का लोन लेना पड़ेगा।
लोन की राशि बढ़ने पर EMI और कुल ब्याज दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए संभव हो तो अपनी क्षमता के अनुसार पर्याप्त डाउन पेमेंट करना बेहतर रहता है।









