वाराणसी में आयोजित विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक सोच और गंगा के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक देश में यह धारणा बनाई गई कि भारतीय किसी काम के नहीं हैं और केवल विदेशी ही श्रेष्ठ हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी शक्तियों, वामपंथी विचारधारा और भारत-विरोधी तत्वों ने भारत की क्षमताओं को कमतर दिखाने का प्रयास किया और आज भी ऐसी कोशिशें जारी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को समझने तथा उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने बचपन का एक अनुभव साझा करते हुए गंगा के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बचपन में उनकी मां उन्हें घर के पास बनी छोटी-छोटी क्यारियों में खेती करने के लिए प्रेरित करती थीं। जब पौधों में कीड़े लग जाते थे या उनमें फूल नहीं आते थे, तब उनकी मां गंगाजल लाकर पौधों पर छिड़क देती थीं।
सीएम योगी ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से कुछ दिनों बाद पौधों में फिर से फूल खिलने लगते थे। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव से उन्हें गंगा के महत्व और उसके प्रति लोगों की आस्था को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का आयोजन काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्वतंत्रता भवन में किया गया। कार्यक्रम से पहले बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री का अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया।
विज्ञान भारती का यह दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 13 और 14 जून को आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश और विदेश से लगभग 1200 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
अधिवेशन का उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, नवाचार और समकालीन विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करना है।









