
अंबेडकरनगर में नवजात शिशुओं में जन्म के समय होने वाली सांस संबंधी समस्या ‘बर्थ एस्फिक्सिया’ से होने वाली मृत्यु और मस्तिष्क क्षति को कम करने के उद्देश्य से रविवार को बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम (bNRP) पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (NNF) के तहत किया गया।
महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के निर्देशन में बाल रोग विभाग की ओर से केंद्रीय पुस्तकालय स्थित स्किल लैब में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यशाला दो पालियों में संचालित की गई। पहली पाली सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चली।
‘गोल्डन मिनट’ में उपचार पर विशेष जोर
कार्यशाला में नवजात शिशु के जन्म के बाद पहले एक मिनट यानी ‘गोल्डन मिनट’ के महत्व पर विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस दौरान सही तरीके से उपचार मिलने पर नवजात में मस्तिष्क क्षति और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले की प्रसव इकाइयों पर कार्यरत डॉक्टरों और पैरामेडिक्स को नवजात पुनर्जीवन तकनीक में दक्ष बनाना रहा, ताकि जन्म के समय सांस न लेने वाले शिशुओं को तत्काल उपचार दिया जा सके।
90 स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के 40 डॉक्टर और पैरामेडिक्स ने हिस्सा लिया। इसके अलावा जिले की विभिन्न प्रसव इकाइयों से 50 डॉक्टर और पैरामेडिक्स भी प्रशिक्षण में शामिल हुए।
प्रशिक्षण सत्र में बाल रोग विशेषज्ञ आचार्य डॉ. विजय यादव, सह आचार्य डॉ. अतुल कुमार मिश्रा, सहायक आचार्य डॉ. अमित गुप्ता और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ सह आचार्य डॉ. प्रिया सिंह ने प्रतिभागियों को नवजात पुनर्जीवन से जुड़ी तकनीकी जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने नवजात की आपात स्थिति में तत्काल उपचार, सांस बहाल करने की प्रक्रिया और प्राथमिक देखभाल के तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।









