FD तोड़ें या उस पर लोन लें?

  • अचानक पैसों की जरूरत में क्या है सही विकल्प
  • FD तोड़ने पर ब्याज और पेनल्टी का नुकसान
  • FD वैल्यू का 90% तक मिल सकता है लोन

नई दिल्ली। मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत या किसी अन्य अचानक आए खर्च के समय लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को समय से पहले तोड़ा जाए या उसके बदले लोन लिया जाए। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सही फैसला आपकी जरूरत, समय और चुकाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

जरूरत के हिसाब से लें फैसला

अगर पैसों की जरूरत अचानक पड़ गई है, तो सबसे पहले यह तय करें कि आपको कितनी राशि चाहिए, कितने समय के लिए चाहिए और उसे वापस चुकाने की क्षमता कितनी है। यदि जरूरत कुछ महीनों की है, तो FD तोड़ने की बजाय उस पर लोन लेना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

FD तोड़ने पर होता है नुकसान

बैंक समय से पहले FD तोड़ने पर आमतौर पर 0.5% से 1% तक पेनल्टी वसूलते हैं। साथ ही ग्राहक को तय अवधि का नहीं, बल्कि जितने समय तक FD बैंक में रही, उसी अवधि के अनुसार कम ब्याज मिलता है। इससे निवेश पर मिलने वाला कुल रिटर्न घट जाता है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ने 1 लाख रुपए की FD एक साल के लिए 6% ब्याज पर कराई है और छह महीने बाद उसे तोड़ देता है, तो बैंक 6% की बजाय कम अवधि के हिसाब से लगभग 5% ब्याज देगा। इसके अलावा पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।

FD पर 90% तक मिल सकता है लोन

बैंक FD की कुल राशि का लगभग 90% तक लोन उपलब्ध कराते हैं। यानी यदि आपकी FD 1 लाख रुपए की है, तो आपको करीब 90 हजार रुपए तक का लोन मिल सकता है। इस लोन पर ब्याज दर आमतौर पर FD पर मिलने वाले ब्याज से 1 से 2 प्रतिशत अधिक होती है।

लोन नहीं चुकाया तो क्या होगा?

यदि कोई व्यक्ति FD के बदले लिया गया लोन समय पर नहीं चुका पाता, तो FD मैच्योर होने पर बैंक पहले बकाया लोन और ब्याज की राशि काट लेता है। इसके बाद बची हुई रकम ग्राहक के खाते में जमा कर दी जाती है।

क्या है बेहतर विकल्प?

अगर जरूरत कम समय के लिए है और आप समय पर लोन चुका सकते हैं, तो FD तोड़ने के बजाय उसके बदले लोन लेना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इससे आपकी FD भी जारी रहती है और उस पर मिलने वाला ब्याज भी मिलता रहता है।

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