लखनऊ। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से शहर के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है, जबकि करीब 3 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। बढ़ते जलस्तर का असर गोमती तट पर स्थित मंदिरों पर भी दिखाई दे रहा है। पातालपुरी स्थित लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह पानी में डूब गया है।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, हनुमान जी की प्रतिमा के ऊपर करीब 13 फीट पानी बह रहा है। सुरक्षा को देखते हुए मंदिर के मुख्य हिस्से यानी गर्भगृह को बंद कर दिया गया है।
दर्शन के लिए बाहर रखी चरण पादुका
मंदिर के पुजारी महंत विनोद तांगड़ी ने बताया कि गर्भगृह में पानी भरने के बाद भक्तों के दर्शन के लिए हनुमान जी की चरण पादुका बाहर रखी गई है। उनका कहना है कि गोमती नदी ने मंदिर को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया है।
महंत के मुताबिक, हनुमान जी को स्नान कराने के बाद अब विश्राम अवस्था में रखा गया है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह के भीतर जाने की अनुमति नहीं है।
2006 के बाद पहली बार ऐसे हालात
महंत विनोद तांगड़ी ने बताया कि वर्ष 2006 के बाद पहली बार मंदिर में ऐसी स्थिति बनी है। जलस्तर कम होने की कामना को लेकर मंदिर में विशेष पूजा की गई। इस दौरान 51 लीटर दूध से हनुमान जी का अभिषेक भी किया गया।
गोमती का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से भी संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
फैजुल्लागंज और घैला में भी पानी का असर
महंत ने बताया कि लखनऊ की करीब 30 प्रतिशत आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। खास तौर पर डाउनस्ट्रीम इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फैजुल्लागंज और घैला समेत कई इलाकों में पानी तेजी से बढ़ रहा है और कई स्थानों पर जलभराव गंभीर स्थिति में पहुंच गया है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि गोमती नदी का जलस्तर अभी लगातार बढ़ रहा है। इससे तट के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आने वाले समय में और मुश्किलें खड़ी होने की आशंका है।
प्रकृति से छेड़छाड़ को बताया वजह
महंत विनोद तांगड़ी ने मौजूदा स्थिति को मानवीय गतिविधियों से भी जोड़ते हुए कहा कि कहीं न कहीं यह हमारी अपनी गलतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि नदियों का सम्मान नहीं किया गया और प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन होता रहा।
उन्होंने पेड़ों की कटाई और प्रकृति के साथ बिगड़ते संतुलन को भी मौजूदा हालात से जोड़ते हुए कहा कि आज उसका असर सामने दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, नदियों और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हजारों घरों में पानी पहुंचने और बड़ी आबादी के प्रभावित होने के बीच राहत और बचाव व्यवस्था पर भी नजर बनी हुई है।
लेटे हनुमान मंदिर का गर्भगृह पानी में डूबना भी बढ़ते जलस्तर की गंभीरता को दिखाता है। फिलहाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मुख्य गर्भगृह बंद है और जलस्तर कम होने का इंतजार किया जा रहा है।
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