तिरुवनंतपुर। मकेरल हाईकोर्ट ने धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी गतिविधियों को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में ऐसी गतिविधियों की जगह नहीं है। शिक्षण संस्थान पढ़ाई के लिए हैं, राजनीति के लिए नहीं। यदि छात्र इस तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं तो उन्हें संस्थान से निष्कासित भी किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी कालडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी के 16 निलंबित छात्रों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
16 निलंबित छात्रों को नहीं मिली राहत
मामले में निलंबित किए गए 16 छात्र स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े हैं। सिंगल जज ने अंतरिम राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में बैठने की इजाजत दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने इस आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद छात्रों के लिए परीक्षा में शामिल होने का रास्ता फिलहाल बंद हो गया है।
छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सभी 16 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। छात्रों ने मांग की है कि उन्हें सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि यदि उन्हें परीक्षा देने का मौका नहीं मिला तो उनका पूरा सेमेस्टर बर्बाद हो सकता है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर है। छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलेगी या नहीं, यह शीर्ष अदालत के रुख से स्पष्ट होगा।









