लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के क्रिटिकल केयर मेडिसिन (CCM) विभाग में प्रेसिजन मेडिसिन की मदद से हर साल 40 से 45 बेहद गंभीर मरीजों की जान बचाने का दावा किया गया है। ये वे मरीज हैं, जिन्हें गंभीर हालत में वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। विभाग के अनुसार, इस तकनीक की मदद से पिछले तीन वर्षों में 135 से अधिक मरीजों को नया जीवन देने में सफलता मिली है।
मृत्यु दर में 10 प्रतिशत की कमी का दावा
CCM विभाग के प्रमुख डॉ. अविनाश अग्रवाल के मुताबिक, विभाग में हर साल करीब 1,400 गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। इनमें से कई मरीजों को कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि पहले मरीजों की मृत्यु दर करीब 25 प्रतिशत थी। इसमें कमी लाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रेसिजन मेडिसिन से बेहतर परिणाम मिले। विभाग के अनुसार, इस पद्धति से मृत्यु दर में 10 प्रतिशत की कमी आई है।
वर्ष 2023 से इस्तेमाल हो रही तकनीक
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, विभाग में वर्ष 2023 से प्रेसिजन मेडिसिन आधारित उपचार का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। पारंपरिक कल्चर-बेस्ड एंटीबायोटिक उपचार की तुलना में मरीज की स्थिति और जरूरत के अनुरूप इलाज करने से सुधार में मदद मिली है। इस पद्धति का उद्देश्य गंभीर मरीजों के लिए अधिक सटीक और प्रभावी उपचार चुनना है।
यूपी सरकार ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को दी मंजूरी
KGMU के CCM विभाग में प्रेसिजन मेडिसिन इन प्रिवेंटिव केयर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने को उत्तर प्रदेश सरकार से मंजूरी मिली है। विभाग के इन प्रयासों को संस्थागत पहचान देने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है। इस सेंटर के जरिए प्रेसिजन मेडिसिन आधारित उपचार को आगे बढ़ाने और गंभीर मरीजों की देखभाल में सुधार की संभावनाएं हैं।
प्रेसिजन मेडिसिन क्या है?
प्रेसिजन मेडिसिन ऐसी उपचार पद्धति है, जिसमें मरीज की व्यक्तिगत स्थिति, बीमारी की प्रकृति और जांच के नतीजों के आधार पर इलाज तय किया जाता है। गंभीर संक्रमण के मामलों में इससे उपयुक्त उपचार चुनने में मदद मिल सकती है।









