- पहाड़ी इलाकों में हाईवे और प्रमुख सड़कों पर नाकेबंदी से आवाजाही प्रभावित
- कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी ₹400-450 किलो तक पहुंचने की शिकायत
- 4 दिनों में 6 कुकी लोगों की हत्या, कुकी संगठनों ने नगा समूहों पर लगाया आरोप
इंफाल। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में कुकी और नगा समुदायों के बीच बढ़े तनाव का असर सामान्य जनजीवन पर पड़ रहा है। कई इलाकों में करीब सात दिनों से स्कूल और बाजार बंद हैं। नाकेबंदी के कारण सात पहाड़ी जिलों से संपर्क प्रभावित होने की बात सामने आई है। सड़कों और हाईवे पर बनाए गए चेक प्वाइंट के चलते निजी वाहनों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
तनाव के चलते जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ गांवों में खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं और लोग सुरक्षा को लेकर घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
कांगपोकपी में चीनी के दाम बढ़ने की शिकायत
कांगपोकपी जिले के कुछ ग्रामीण इलाकों में चीनी की कीमत ₹400 से ₹450 प्रति किलो तक पहुंचने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय के आसपास जरूरी सामान किसी तरह मिल जा रहा है, लेकिन दूरदराज के गांवों में सप्लाई की स्थिति ज्यादा खराब है।
स्थानीय निवासी मार्गरेट के मुताबिक, कांगपोकपी जिला मुख्यालय में होने के कारण उन्हें जरूरी सामान मिल जाता है, लेकिन गांवों में हालात ज्यादा कठिन हैं। उनके अनुसार कुछ जगहों पर एक किलो चीनी ₹400-450 में बिक रही है।
खेतों और अस्पताल तक पहुंचना भी मुश्किल
स्थानीय लोगों के मुताबिक, डर के कारण कई परिवार खेतों में काम करने नहीं जा पा रहे हैं। लोगों को आशंका है कि रास्ते में अचानक गोलीबारी हो सकती है। इससे खेती से जुड़े रोजमर्रा के काम भी प्रभावित हुए हैं।
एक स्थानीय निवासी डेविड ने बताया कि मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अस्पताल या एयरपोर्ट तक पहुंचना भी आसान नहीं रह गया है। उनके मुताबिक, कुछ इलाकों में आवाजाही के लिए स्थानीय प्रशासनिक अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है।
चार दिनों में 6 कुकी लोगों की हत्या का मामला
पिछले कुछ दिनों में हुई हिंसक घटनाओं में छह कुकी लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें चार महिलाएं शामिल हैं। 13 सितंबर को तमेंगलोंग और आसपास के इलाकों में अलग-अलग हमलों में चार कुकी नागरिकों की हत्या हुई थी। इसके बाद 15 सितंबर को तमेंगलोंग जिले में दो और कुकी-जो महिलाओं की गोली मारकर हत्या की गई।
इन घटनाओं के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया है। कई ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
कुकी संगठनों ने नगा समूहों पर लगाया आरोप
कुकी संगठनों और कुछ स्थानीय संगठनों ने हालिया हत्याओं के लिए नगा उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। 13 सितंबर की घटनाओं के बाद भी कुकी संगठनों ने NSCN(IM) और ZUF(K) से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए थे। हालांकि, पुलिस और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में सभी मामलों में हमलावरों की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है।
इसी वजह से हत्याओं के आरोपों और जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है। दूसरी ओर, नगा समुदाय से जुड़े संगठनों ने भी हिंसा की घटनाओं की निंदा की है और संयम की अपील की है।
इस साल कुकी-नगा हिंसा में 40 मौतों का दावा
स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी 2026 में शुरू हुए मौजूदा कुकी-नगा संघर्ष के बाद अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने सितंबर की शुरुआत में फरवरी से शुरू हुई हिंसा में कम से कम 34 मौतों की जानकारी दी थी। अलग-अलग समय पर सामने आए आंकड़ों में अंतर है, इसलिए कुल संख्या स्रोत और तारीख के अनुसार बदल सकती है।
नाकेबंदी से आपूर्ति और सुरक्षा पर असर
मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में पहले भी नाकेबंदी के कारण जरूरी वस्तुओं, ईंधन और चिकित्सा आपूर्ति पर असर पड़ चुका है। ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, हाईवे की नाकेबंदी से कांगपोकपी जैसे कुकी-बहुल इलाकों में जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हुई थी।
मौजूदा हालात में स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता सुरक्षित आवाजाही, जरूरी सामान की उपलब्धता और मेडिकल इमरजेंसी के दौरान समय पर मदद तक पहुंचने को लेकर बनी हुई है।









