नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद निर्णय लेंगे। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले इस पर फैसला आ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा स्पीकर कार्यालय ने ममता बनर्जी खेमे के सांसदों को भी बैठक के लिए बुलाया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि स्पीकर इस मामले में कानून मंत्रालय की राय भी ले सकते हैं, ताकि भविष्य में किसी कानूनी चुनौती की स्थिति में फैसला मजबूत आधार पर टिका रहे।
रविवार को TMC के 20 बागी सांसदों में से 17 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने के साथ अपने गुट के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की जानकारी भी दी।
हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं। पूर्व लोकसभा महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य के अनुसार, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत केवल राजनीतिक दल ही किसी दूसरे दल में विलय कर सकता है। सांसद या विधायक व्यक्तिगत रूप से किसी अन्य पार्टी में विलय नहीं कर सकते।
एक पूर्व चुनाव आयोग अधिकारी ने भी बागी सांसदों के NCPI में विलय के प्रस्ताव को असामान्य बताते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था का उल्लेख न तो दल-बदल कानून में है और न ही जनप्रतिनिधित्व कानून में किया गया है।









