- हाईकोर्ट जाने की कही बात
- आदेश पर उठाए सवाल
- मस्जिद के समर्थन में दस्तावेज होने का दावा
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को हटाने के आदेश के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आदेश उन्हें न्यायिक से अधिक प्रशासनिक और शासनिक प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी संपत्ति का स्वामित्व केवल खसरा रिकॉर्ड के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
इमरान मसूद ने कहा कि प्रशासन को पहले अपने स्वामित्व संबंधी सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा और वहां सभी उपलब्ध दस्तावेज पेश किए जाएंगे।
सांसद ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद का अस्तित्व वर्ष 1911 से है। उनके अनुसार इसके समर्थन में पुराने बिजली कनेक्शन सहित कई ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं।
बुलडोजर कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि केवल खसरे के आधार पर कार्रवाई होगी तो उसी परिसर में स्थित मंदिर पर भी वही नियम लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद मंदिर या मस्जिद से नहीं, बल्कि नफरत फैलाने की कोशिशों से पैदा हो रहा है।
गौरतलब है कि 16 जुलाई को नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर की 315 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर बने मस्जिद के हिस्से को अवैध कब्जा मानते हुए 30 दिन के भीतर उसे हटाने का आदेश दिया था। साथ ही करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जमा कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आदेश का पालन न होने पर प्रशासन को बलपूर्वक कार्रवाई की अनुमति दी गई है।









