पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। देशभर में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो अहम दवाओं- सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की भारी कमी सामने आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कैंसर के कई प्रमुख प्रकारों के इलाज पर असर पड़ सकता है और हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं।
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चेयरपर्सन डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार, पिछले दो से तीन सप्ताह से इन दोनों दवाओं की आपूर्ति प्रभावित है। ये दवाएं कैंसर उपचार की फर्स्ट लाइन थेरेपी का हिस्सा हैं और फेफड़ों के कैंसर, मुंह के कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, गर्भाशय कैंसर, ओवरी कैंसर और टेस्टिकुलर कैंसर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जाती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में आई बाधाओं की वजह से इन जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हुई है। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो मरीजों के इलाज की समयसीमा और उपचार की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
भोपाल, दिल्ली और मुंबई के विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए दवाओं की वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और समय रहते पर्याप्त स्टॉक तैयार करना जरूरी होगा। फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि ये दवाएं कई गंभीर कैंसर के इलाज की आधारशिला मानी जाती हैं।









