नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड के उपयोग को लेकर दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास, पता और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। याचिका में मांग की गई है कि आधार कार्ड का उपयोग केवल पहचान सत्यापन (आइडेंटिटी वेरिफिकेशन) तक सीमित रखा जाए।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि आधार अधिनियम की धारा 9 स्पष्ट रूप से कहती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है। साथ ही UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी आधार को केवल पहचान का प्रमाण बताया गया है।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि आधार के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज आसानी से हासिल किए जा रहे हैं, जिससे अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों को भी लाभ मिल सकता है।
इसके अलावा याचिकाकर्ता ने मतदाता पंजीकरण सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए चुनावी व्यवस्था में सुधार और एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति के गठन की मांग की है। समिति में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।









