मंत्री की शादी का कार्ड बना विरोध का हथियार

बोले- मांग नहीं मानी तो बाराती बनकर पहुंचेंगे- 68500 और 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया शादी का कार्ड

लखनऊ। लखनऊ में 68500 और 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की प्रस्तावित शादी को अपने विरोध का मुद्दा बना लिया है। अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर शादी का एक कार्ड शेयर किया है, जिसमें 27 नवंबर 2026 को दिल्ली में विवाह समारोह होने का दावा किया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो वे शादी समारोह में बिना बुलाए मेहमान और बाराती की तरह पहुंचेंगे।

वायरल कार्ड को शादी के निमंत्रण पत्र की तरह डिजाइन किया गया है। इसमें ‘शुभ विवाह’ के साथ ‘शिक्षा ही देश का भविष्य है’ लिखा गया है। कार्ड में 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को विशेष रूप से आमंत्रित किए जाने की बात कही गई है। साथ ही अभ्यर्थियों से शादी समारोह में पहुंचकर वर-वधू को आशीर्वाद देने की अपील की गई है। हालिया रिपोर्टों में भी इस कार्ड के जरिए अभ्यर्थियों के विरोध की जानकारी सामने आई है।

पोस्टर-बैनर के साथ पहुंचने का दावा

अभ्यर्थियों की ओर से शेयर किए गए कार्ड में शादी की तारीख और दिल्ली का स्थान दिया गया है। कार्ड के जरिए प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि वे शादी समारोह में अपने मुद्दे से जुड़े पोस्टर और बैनर लेकर पहुंच सकते हैं। इससे पहले भी 68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संदीप सिंह की 27 नवंबर को दिल्ली में शादी प्रस्तावित है। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में अंतिम कार्यक्रम में बदलाव की संभावना भी बताई गई है।

भर्ती मामले पर अभ्यर्थियों की क्या मांग?

69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण और चयन सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं हुआ। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में भी चल रहा है।

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अभ्यर्थी अमित मौर्य ने दावा किया कि वे पिछले कई वर्षों से मामले को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामला पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल और डबल बेंच तक गया और अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में लगातार देरी हो रही है।

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