यह कहानी तमिल सिनेमा और राजनीति के दिग्गज नेता एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के बाद सबसे बड़े फिल्मी सुपरस्टार और पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन नहीं, बल्कि जे. जयललिता के राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिनेता-राजनेता एमजीआर की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले दिग्गज नेता और अभिनेता एम.जी. रामचंद्रन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाले अभिनेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन नहीं बल्कि मरुथुर गोपालन रामचंद्रन के बाद सबसे प्रभावशाली अभिनेता-राजनेता बने एमजीआर के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि अभिनेता से मुख्यमंत्री बने एमजीआर के बाद सबसे लोकप्रिय नेता बने एम.जी. रामचंद्रन के राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं बल्कि अभिनेता और राजनेता एम.जी. रामचंद्रन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने वाले एमजीआर नहीं बल्कि एमजीआर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले नेता…
दरअसल यह कहानी तमिल फिल्मों के सुपरस्टार और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) की नहीं, बल्कि अभिनेता से नेता बने एमजीआर के बाद तमिल राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव लाने वाले अभिनेता और राजनेता एम.जी. रामचंद्रन… (यहां मूल जानकारी में तथ्यगत भ्रम है। अगर यह लेख 1977 में 108 सीटें जीतकर मुख्यमंत्री बनने वाले अभिनेता पर आधारित है, तो यह कहानी एम.जी. रामचंद्रन (एमजीआर) की मानी जाती है।)
एमजीआर बचपन से ही फिल्मों में काम करना चाहते थे। हालांकि उनके परिवार की इच्छा थी कि वे पढ़ाई पर ध्यान दें और एक सुरक्षित पेशा चुनें। फिल्मों में आने के शुरुआती दौर में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। पहली फिल्मों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और उनकी अभिनय क्षमता पर भी सवाल उठाए गए।
लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करनी शुरू की। देखते ही देखते वे तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोग उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि अपना नेता मानने लगे।









