अंकारा। तुर्किये ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से इनकार किया है। तुर्किये के रक्षा मंत्री यासर गुलर ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनका देश इस लड़ाई का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तुर्किये का उद्देश्य सऊदी अरब की सुरक्षा मजबूत करना और उसके दुश्मनों को हमला करने से रोकना होगा।
मक्का रक्षा समझौते के बाद आया बयान
तुर्किये का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगस्त में तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने मक्का रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, गुलर के बयान से संकेत मिलता है कि समझौते के बावजूद तुर्किये हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है।
पाकिस्तान ने भी सैन्य भागीदारी से किया था इनकार
यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब की मदद के लिए दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल होने से इनकार किया था। पाकिस्तान का कहना था कि उसकी सेना किसी दूसरे देश की धरती पर युद्ध में भाग नहीं लेगी।
ट्रम्प ने सीधे अमेरिकी हमले से किया इनकार
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका से सीधे सैन्य हमले की मांग की थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इससे इनकार कर दिया। ऐसे में सऊदी अरब की सुरक्षा और हूती विद्रोहियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई को लेकर क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं।
तुर्किये के रक्षा मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि उनका देश सऊदी अरब की सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर देगा, लेकिन हूती विद्रोहियों के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल होने से दूरी बनाए रखेगा।









